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समाज को लेनी होगी ज़िम्मेदारी तभी पानी से समृद्ध बनेगा देश
Riverman of India
Jul 01 2024
समाज को लेनी होगी ज़िम्मेदारी तभी पानी से समृद्ध बनेगा देश
अन्तराष्ट्रीय रैटिंग एजेंसी मूडीज के ताजा सर्वे के अनुसार भारत में जिस प्रकार बेहिसाब भूजल का दोहन किया जा रहा है उससे भारत की साख को बट्टा लग सकता है। मूडीज ने अपने सर्वे में कहा है कि भारत की लगातार बढ़ती आबादी, औधागिकीकरण तथा शहरीकरण के कारण भूजल का स्तर लगातार नीचे खिसक रहा है। भारत को भविष्य में पानी की कमी के कारण कृषि संकट, बाढ़-सुखाड़ व मंहगाई जैसी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
मूडीज ने यह अपने सर्वे में अवश्य
बताया है लेकिन हमें अपनी नंगी आंखों से यह सब होते हुए दिखने लगा है। घनी आबादी के कारण बड़े शहरों का भूजल रसातल में पहुंच गया है और प्रदूषित भी हो गया है। यही कारण है कि इन शहरों की पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए नहरों व नदियों से पानी लेना पड़ रहा है। दूसरी ओर मौसम परिवर्तन की मार से गंगा जैसी बड़ी नदियों में भी पानी लगातार कम हो रहा है। भविष्य में जब नदियों में ही पानी कम होगा तो नहरों के माध्यम से फसलों की व बड़े शहरों की पानी की आपूर्ति अवश्य बाधित होगी। इसके दो उदाहरण इस वर्ष बैंगलूरू व दिल्ली जल संकट से दिख भी चुका है। पानी के स्थाई समाधान हेतु बड़े शहरों में जल संरक्षण के पुख़्ता इंतज़ाम करने होंगे. अगर दिल्ली में पानी संरक्षण के साधन तालाब, बड़ी झीलें वि वर्षाजल संरक्षण के साधन समुचित मात्रा में होते तो वर्षाजल का बड़ा हिस्सा सड़कों पर न भरकर उनमें एकत्र हो जाता और धीरे-धीरे भूजल में जाकर मिल जाता. इससे जहां भूजल का स्तर बढ़ता वहीं उसकी गुणवत्ता में भी सुधार होता.
अगर देश को भविष्य के गंभीर जल संकट से पार पाना है तो सुधार हेतु तेजी से कदम बढ़ाने ही होंगे। हमें जहां पानी के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने होंगे वहीं अपनी पानी की खपत को भी सीमित करना होगा। पानी की खपत सर्वाधिक कृषि व उधोगों में होती है। इन दोनों में पानी के कम उपयोग तथा पुनः उपयोग के चलन को बढ़ाना पड़ेगा। देश में जितने भी सीवेज शोधन संयंत्र लगे हुए हैं उनसे शोधित पानी को कृषि व उधोग में देने की प्रक्रिया को प्रारम्भ करना ही होगा। इससे जहां भूजल पर दबाव कम होगा वहीं बिजली व पैसे की भी बचत होगा। सरकारों द्वारा कृषि क्षेत्र को पानी समृद्ध बनाने के लिए किसानों को कम पानी चाहने वाली फसलों की पैदावार करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तथा इसके लिए ठोस कदम उठाने चाहिएं। किसानों को निःशुल्क बिजली देने पर भी पुनः विचार करने की आवश्यकता है। उधोगों द्वारा अपना पानी पुनः इस्तेमाल में लाया जाए इसके लिए ठोस व सख्त कदम अति आवश्यक हैं। उधोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जितना पानी उनके द्वारा उपयोग में लाया जाता है उतना या उससे अधिक पानी रिचार्ज करने का ईमानदारी से कार्य करना चाहिए। समाज भी कैसे पानी की बर्बादी व उपभोग को कम करे इसके लिए भी ठोस पहल करने की आवश्यकता है।
उपरोक्त सभी कार्यों में समाज व सरकार की साझा भूमिका आवश्यक है। इसमें ‘कैच द रेन’ जैसे कार्यक्रम प्रभावी हो सकते हैं, अगर इसमें समाज अपनी महती भूमिका के साथ शामिल हो जाए, क्योंकि कैच द रेन के अन्तर्गत तालाबों व छोटी नदियों का पुनर्जीवन, पौधरोपण, जल स्रोतों की गणना तथा पुराने बोरिंग के माध्यम से पानी को रिचार्ज करने जैसे प्रावधान हैं। इस वर्ष कैच द रेन के माध्यम से नारी शक्ति से जल शक्ति का संदेश दिया गया है। यह सही भी है कि परिवार में पानी का सर्वाधिक सरोकार महिलाओं से रहता है। घर में खाना बनाने से लेकर, कपड़े धोने, बर्तन साफ करने, पौछा लगाने व पेयजल आदि के लिए महिलाएं व पानी एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसे में अगर देश की महिलाएं इस कैच द रेन कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगी तो निश्चित ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलंेगे।
कैच द रेन कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु देश के सभी गांव प्रधानों, सामाजिक संगठनों, जल कार्यकर्ताओं तथा सेवानिवृत हो चुके जुझारू लोगों के साथ जिला प्रशासन संगठित समन्वय आवश्यक है। अगर किसी जनपद के राजस्व में दर्ज सभी तालाब तथा वहां की छोटी नदियों को पुनर्जीवित कर दिया जाएगा तो उस जनपद को कभी पानी की कमी नहीं होगी। संकट यही है कि हमारे पास बरसात के पानी को संभालने के लिए संपूर्ण व्यवस्थाएं ही नहीं बची हैं जोकि पहले हुआ करती थीं। नदियों के किनारे सघन पौधारोपण करने से जहां हरियाली बढ़ेगी वहीं नदी में धीरे-धीरे पानी की आपूर्ति भी बढ़ेगी। छोटी नदियों में बंधे बनाने से पानी रूककर बहेगा जोकि भूजल को भी रिचार्ज करेगा तथा नदी में भी पानी बना रहेगा।
अगर हम बरसात के पानी को संजोने के साधनों को संवार लें तो हम पानीदार बन सकते हैं।
यह कार्य सरकारी स्तर से हो जाएगा ऐसा संभव नहीं है इसमें समाज को भूमिका बहुत जरूरी है। समाज को भी सब कुछ सरकार पर न छोड़कर देश को जल समृद्ध बनाने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी।
रमन कांत
रिवरमैन
अध्यक्ष - भारतीय नदी परिषद्
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